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2022, VOL. 8 ISSUE 2, PART B

गर्भावस्था एवं महिलाओं की स्‍वास्‍थ-चेतना

Author(s): सीता कुमारी
Abstract:
भोजन स्वास्थ्य और पोषण के बीच गहरा पारस्परिक सम्बन्ध हैं। पन्द्रहवीं सदी के आते-आते आहार के पोषक मूल्यों के क्षेत्र में चिन्तन होना प्रारंभ हो चुका था। बीसवीं सदी के प्रारम्भ से ही पोषण के वैज्ञानिक शोधकार्य होने लगे थे। सर्वप्रथम शरीर वैज्ञानिक कार्लवोयह ने शरीर के लिए प्रोटीन कार्बोहाईड्रेट 'व' वसा के महत्त्व पर प्रकाश डाला था। उसके बाद से आज तक आहार एवं पोषण के क्षेत्र में अतिमहत्वपूर्ण शोध कार्य हुए।
भोजन मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकता है। हर एक उम्र में हर एक व्यक्ति को संतुलित आहार की आवश्यकता होती है। उचित पोषण के द्वारा व्यक्ति कि शरीर की आन्तरिक और बाह्य क्रियाएँ सचारू रूप से क्रियाशील रहती हैं। उचित पोषण द्वारा शरीर का उत्तम विकास होता है। अस्थियाँ और पेशियाँ पूष्ट रहती हैं। आन्तरिक क्रियाएँ उत्तम ढंग से कार्य रहते हैं। दाँत तथा मसुढे स्वास्थ्य रहते हैं। बाल त्वचा में चमक रहती है। आँखें क्रान्तिपूर्ण होती है तथा व्यक्ति में मानसिक और संवेगात्मक स्थिरता और संतुलन रहता है। कुपोषण पोषण की वह स्थिति है जिसमें भोज्य पदार्थ के गुण और परिमाण में अपर्याप्त होती है। संतुलित आहार के आभाव में व्यक्ति कुपोषण का शिकार हो जाता है।
Pages: 84-89  |  20 Views  5 Downloads
How to cite this article:
सीता कुमारी. गर्भावस्था एवं महिलाओं की स्‍वास्‍थ-चेतना. Int J Home Sci 2022;8(2):84-89.
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