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2020, VOL. 6 ISSUE 3, PART F

ग्रामीण महिलाओं में परिवार नियोजन: एक समस्या

Author(s): कुमारी रजनी
Abstract:
भारत दुनिया में पहला देश है जिसने 1952 में परिवार नियोजन के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया था। 1952 की अपनी ऐतिहासिक शुरुआत के बाद से परिवार नियोजन कार्यक्रम ने नीतियों और वास्तविक कार्यक्रम क्रियान्वयन के अनुसार परिवर्तन किया है। इसमें नैदानिक दृष्टिकोण से प्रजनन बाल स्वास्थ्य दृष्टिकोण में क्रमिक बदलाव हुआ है और इसके बाद राष्ट्रीय जनसंख्या नीति (एन.पी.पी) 2000 ने समग्र व लक्ष्य मुक्त दृष्टिकोण निर्धारित किया। जिससे प्रजनन क्षमता को कम करने में सहयोग मिला है। वर्षों से यह कार्यक्रम देश के हर भाग में चलाया जा रहा है और इसने ग्रामीण क्षेत्र के पी.एच.सी व एस.सी, शहरी परिवार कल्याण केन्द्र व प्रसवोत्तार केन्द्र में भी अपनी पहँुच बनाई है। तकनीकी विकास गुणवत्ता में सुधार, व स्वास्थ्य देखभाल की कवरेज के कारण अशोधित जन्म दर व विकास दर में तेजी से गिरावट हुई है (2011 की जनगणना के अनुसार दशकीय विकास दर में तेजी से गिरावट हुई है)। विभिन्न नीतिगत दस्तावेजों में वर्छणत परिवार कल्याण संबंधी लक्ष्यों एवं उद्देश्यों को पूरा करने और भारत सरकार की वचनबद्धताओं (आई.सी.पी.डी. सहितः अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या एवं विकास सम्मेलन, एम.डी.जी सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों परिवार नियोजन और (एफ.पी.) 2020, शिखर सम्मेलन तथा अन्य सहित) को पूरा करने के लिए परिवार नियोजन प्रभाग के उद्देश्यों, कार्यनीतियों एवं कार्यकलापों की रूपरेखा तैयार की गई है और उनको प्रचलित किया गया है।
Pages: 350-351  |  7 Views  1 Downloads
How to cite this article:
कुमारी रजनी. ग्रामीण महिलाओं में परिवार नियोजन: एक समस्या. Int J Home Sci 2020;6(3):350-351.
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