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2019, VOL. 5 ISSUE 2, PART E

भारत में हरिजन और दलित बच्चों में कुपोषण

Author(s): डॉ चन्द्रा कर्ण
Abstract:
हमारे देश को आजाद हुए सात दशक से ज्यादा का समय हो चुका है| इन वर्षों में हमने कई मामलों में काफी तरक्की की है| लेकिन स्वास्थ्य के क्षेत्र में समायानुकुल प्रगति नहीं हुई है| जिस कारण ‘कुपोषण’ एक बदनुमा दाग की तरह देश की पहचान के साथ चिपका हुआ है| दुनिया भर में बाल कुपोषण की सर्वोच्च दरों वाले देशों में हमारा देश भारत भी शामिल है| भारत में करीब 39% बच्चें कुपोषण के शिकार हैं| इसके कारण हैं; माता-पिता की गरीबी, लड़का-लड़की में भेदभाव, लड़की का कम उम्र में माँ बनना, स्तनपान का अभाव, जात-पात का भेदभाव, भोजन की कमी, गंदा परिवेश और प्रदूषित पर्यावरण जैसी अनेक समस्याएं कुपोषण को बढ़ावा देती है|
Pages: 310-312  |  110 Views  2 Downloads
How to cite this article:
डॉ चन्द्रा कर्ण. भारत में हरिजन और दलित बच्चों में कुपोषण. Int J Home Sci 2019;5(2):310-312.
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