2025, VOL. 11 ISSUE 3, PART F
सारण जिले के ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक उद्यम एवं रोजगार सृजन में सोशल मीडिया की संभावनाएँ
Author(s): Shweta Kumari and Manju Kumari Sinha
Abstract:
भारत में डिजिटल क्रांति ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है। विशेष रूप से सोशल मीडिया (जैसे कि फेसबुक, व्हाट्सऐप, यूट्यूब और इंस्टाग्राम) ने न केवल संचार और सामाजिक जुड़ाव का साधन प्रदान किया है, बल्कि यह आर्थिक उद्यम एवं रोजगार सृजन का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। बिहार राज्य का सारण जिला, जहाँ कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था प्रबल है और महिलाओं की भागीदारी मुख्यतः घरेलू एवं सहायक कार्यों तक सीमित रही है, वहाँ सोशल मीडिया ने नए अवसरों के द्वार खोले हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म ग्रामीण महिलाओं के लिए विपणन, ग्राहक संपर्क, डिजिटल शिक्षा और उद्यमिता के विकास में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। उदाहरण के लिए, हस्तशिल्प, सिलाई-कढ़ाई, मखाना उत्पाद, डेयरी और घरेलू खाद्य प्रसंस्करण जैसे लघु उद्यमों को अब ऑनलाइन मंचों के माध्यम से स्थानीय से वैश्विक स्तर तक पहुँचाने की संभावना बनी है। साथ ही, ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों (जैसे मीशो और फ्लिपकार्ट) के साथ एकीकरण ने महिलाओं को प्रत्यक्ष बिक्री की सुविधा प्रदान की है। इस शोध-पत्र का उद्देश्य यह विश्लेषण करना है कि सारण जिले की ग्रामीण महिलाएँ किस प्रकार सोशल मीडिया का प्रयोग अपने आर्थिक उद्यमों और आत्मनिर्भरता के लिए कर रही हैं। इसके अंतर्गत प्राथमिक डाटा सर्वेक्षण (250 महिलाओं का नमूना), द्वितीयक डाटा (NFHS-5, NITI Aayog, TRAI रिपोर्ट्स) तथा केस स्टडीज का उपयोग किया गया है। विश्लेषण से स्पष्ट हुआ कि सोशल मीडिया का प्रयोग करने वाली महिलाओं में से 62% ने अपने मासिक आय में वृद्धि की सूचना दी, जबकि 48% महिलाओं ने रोजगार के नए अवसर पाए। इसके अतिरिक्त, 70% महिलाओं ने यह माना कि सोशल मीडिया ने उनके उत्पादों की दृश्यता और पहचान को बढ़ाया है। इस प्रकार, सोशल मीडिया सारण जिले की ग्रामीण महिलाओं के लिए न केवल संचार का साधन है, बल्कि यह आर्थिक स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास का प्रमुख उपकरण भी है। हालाँकि, डिजिटल साक्षरता, इंटरनेट पहुँच और साइबर सुरक्षा जैसी चुनौतियाँ अभी भी विद्यमान हैं। यह अध्ययन इन अवसरों और चुनौतियों का सम्यक विश्लेषण प्रस्तुत करता है तथा नीति-निर्माताओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए व्यावहारिक सुझाव प्रदान करता है।