2025, VOL. 11 ISSUE 3, PART E
Abstract:भारत एक विकासशील देश है जहाॅ जनसंख्या का एक बड़ा भाग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करता है। महिलाओं की सामजिक आर्थिक और शारीरिक स्थिति ग्रामीण परिवेश में अत्यन्त जटिल और बहुआयामी है। विशेष रूप से प्रजनन स्वास्थ्य की बात करें तो यह न केवल महिलाओं की जैविक आवश्यकताओं से जुड़ा है बल्कि यह उनके सामाजिक, सांस्कृतिक, मानसिक और पारिवारिक जीवन की गहराई से जुड़ा हुआ है आज भी देश के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को प्रजनन स्वास्थ्य से सम्बन्धित आवश्यक जानकारियों, सुविधाओं और अधिकारों से वंचित रहना पड़ता है।
महिलाओं का प्रजनन स्वास्थ्य केवल गर्भधारण, प्रसव एवं परिवार नियोजन तक ही सीमित नहीं है बल्कि यौन स्वास्थ्य, मसिक धर्म प्रबन्धन, पोषण, यौन संचारित रोगों से सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को भी समाहित करता है। ग्रामीण महिलाओं को इन सभी स्तरों पर अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे कि स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता, सामाजिक वर्जनाए, अशि़क्षा, लैंगिक भेदभाव, आर्थिक निर्भरता और पुरूष प्रधान सामाजिक संरचना।
इन अध्ययन का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य की वास्तविक स्थिति का गहराई से विश्लेषण करना है इसके अन्तर्गत महिलाओं की स्वास्थ्य जागरूकता, व्यवहार, सेवाओं की उपलब्धता, उनके उपयोग का स्तर तथा सामाजिक- सांस्कृतिक अवरोधोें की पहचान की जायेगी। यह शोध महिला सशक्तिकरण के दृष्टिकोंण से अत्यन्त महत्वपूर्ण है क्योंकि जब तक महिलाऐं अपने शरीर और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं होगी तब तक उनके सामाजिक सशक्तिकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी। इसके अतिरिक्त इस शोध में यह भी विश्लेषण किया जायेगा कि वर्तमान सरकारी योजनायें और स्वास्थ्य नीतियाॅ महिलाओं तक किस सीमा तक पहुॅच पा रही हैं साथ ही यह शोध सम्भावित समाधान, नीति सुझाव और समुदाय आधारित जागरूकता कार्यक्रमों के निर्माण की दिशा में भी सहायक होगा।