भारत जैसे विकासशील देश में बालिकाओं की शिक्षा पर अब अधिक ध्यान दिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर उनके शैक्षिक यात्रा में कई बाधाएं उत्पन्न होती है। जैसे विद्यालयों और कॉलेजों के आसपास के सार्वजनिक स्थानों पर किशोरियों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है। इस मु्द्दे पर गहन अध्ययन की आवश्यकता है। विद्यालय और कॉलेज केवल शिक्षा का केंद्र नहीं होते हैं बल्कि ये स्थान छात्र-छात्राओं के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास का आधार भी होते हैं। इनके आसपास के सार्वजनिक स्थान जैसे कि बस स्टॉप, पार्क, दुकानों की कतारें, सड़कें और शौचालयों छात्रों के दैनिक जीवन का हिस्सा होते हैं। इन सार्वजनिक स्थानों पर किशोरियों के साथ होने वाली विभिन्न प्रकार की हिंसा जैसे की छेड़छाड़, पीछा करना और उत्पीड़न पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। किशोर लड़कियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है जो उन्हें मानसिक अवसाद और असुरक्षा की ओर ले जाती है न केवल शहरी क्षेत्रों में है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कॉलेज/स्कूली छात्राओं को सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित रखने के लिए स्कूलों, माता-पिता और समुदाय को मिलकर काम करना होगा। इससे स्कूलों में सुरक्षात्मक उपायों को लागू करना, छात्राओं को आत्मरक्षा के लिये प्रशिक्षित करना और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा जागरूकता को बढ़ाना शामिल है। विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरे, अलार्म सिस्टम और सुरक्षा उपकरण स्थापित किए जाने चाहिए।पुरुषों की तुलना में महिलाओं को शहरी परिवेश में खतरों, भय, और असुरक्षा का एक कड़वा अनुभव प्राप्त होता है। दुनिया भर के शहरों में महिलाओं और लड़कियों को यौन हिंसा का निरंतर भय बना रहता है। यात्रा के दौरान या सार्वजनिक स्थानों पर उत्पीड़न और अपराध का डर काफी व्यापक है। महिलाओं और लड़कियों को अवांछित यौन प्रेरित स्पर्श, छेड़छाड़ या रगड़ने जैसी हिंसा का सामना करना पड़ता है। यदि कोई किशोरी सुरक्षित नहीं महसूस करती हैं तो वह स्कूल जाने से कतराने लगती है जिससे उसका शैक्षिक, मानसिक और सामाजिक विकास प्रभावित होता है।