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2021, VOL. 7 ISSUE 1, PART D

अत्यधिक कठिन परिस्थितियों में आहार कुपोषित शिशु : एक अध्‍ययन

Author(s): रूबी कुमारी साह
Abstract:
कुपोषित शिशु एवं छोटे बच्चे अक्सर उस माहौल में पाये जाते हैं। जहाँ पर ग्राह्य भोजन की गुणवत्ता एवं मात्रा बढ़ाना एक समस्या है। कुपोषण की पुनरावृति को रोकने एवं चिरकालिक कुपोषण के प्रभावों पर काबू पाने के लिए ऐसे बच्चों पर प्रारम्भिक पुनर्वास चरण में एवं उसके बाद एक लम्बे समय तक अतिरिक्त ध्यान देने की आवश्यकता होती है। लगातार बार-बार स्तनपान और जब आवश्यकता हो, पुनः स्तनपान मुख्य निवारक उपाय हैं, क्‍योकि कुपोषण की उत्पत्ति अक्सर अपर्याप्त एवं बाधित स्तनपान से होती है। ऐसे में पर्याप्त पोषणिक एवं सुरक्षित पूरक आहार प्राप्त करने से कठिन हो सकता है और ऐसे बच्चों के लिए विशेष रूप से आहारीय पूरकों की आवश्यकता हो सकती है। कुपोषित बच्चों की माताओं को शिविर में बुलाया जा सकता है और उन्हें निर्देशों के साथ 15 दिन का अनाज-दालों का भुना हुआ मिश्रण उपलब्ध कराया जा सकता है। बच्चों की प्रत्येक 15 दिन के बाद विकास प्रबोधन, स्वास्थ्य जांच तथा 3 माह के लिए तत्काल खाद्य रसद के लिए निगरानी की जानी चाहिए। जब उपयुक्त आहार से कुपोषित बच्चों की स्थिति में सुधार हो जाएगा, तो वे स्वयं ही अन्य परिवारों के बच्चों के लिए प्रेरक का कार्य करेंगे।
Pages: 261-264  |  1465 Views  276 Downloads


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How to cite this article:
रूबी कुमारी साह. अत्यधिक कठिन परिस्थितियों में आहार कुपोषित शिशु : एक अध्‍ययन. Int J Home Sci 2021;7(1):261-264.

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