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2020, VOL. 6 ISSUE 3, PART D

किशोरियों का पोषण एक उज्जवल भविष्य की कामना

Author(s): डॉ मेधा कुमारी
Abstract:
भारत में 25.30 करोड़ किशोर-किशोरियों का घर है| हम एक चौराहे पर खड़े हैं| जहाँ दोनों संभावनाएं हैं| हम एक पूरी पीढ़ी की क्षमता खो सकते हैं या उनको पोषित करके मानव-संसाधन को बचा सकते हैं| एक अच्छे भविष्य की कल्पना कर सकते हैं| हम सभी को किशोरावस्था की उम्र में अवसरों को सुनिश्चित करने की ज़रुरत है| पोषण की दृष्टि से किशोरावस्था एक संवेदनशील समय होता है, जब तेज़ शारीरिक विकास के कारण पौष्टिक आहार की मांग में वृद्धि होती है| भारत में किशोरों का बड़ा भाग, 40% लड़कियाँ और 18% लड़के एनीमिया (रक्त की कमी) से पीड़ित हैं|
Pages: 213-215  |  5 Views  1 Downloads
How to cite this article:
डॉ मेधा कुमारी. किशोरियों का पोषण एक उज्जवल भविष्य की कामना. Int J Home Sci 2020;6(3):213-215.
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